
पितृपक्ष 2025 में श्राद्ध पक्ष के दौरान क्या करें और क्या न करें? जानिए वे 10 काम जो भूलकर भी नहीं करने चाहिए, वरना पूरे परिवार को भुगतना पड़ सकता है परिणाम।
पितृपक्ष 2025: इन 10 चीजों को भूलकर भी न करें, नहीं तो पूरे परिवार पर आएगा असर
नई दिल्ली। हिंदू धर्म में पितृपक्ष की बहुत महत्ता है। इसे श्राद्ध पक्ष भी कहते हैं। हर वर्ष भाद्रपद पूर्णिमा से अमावस्या तक 16 दिनों तक पितृपक्ष होता है। इन दिनों अपने पितरों को तर्पण, पिंडदान और दान देकर याद किया जाता है। माना जाता है कि पितृपक्ष में किए हुए कर्म सीधे हमारे पूर्वजों की दृष्टि में चले जाते हैं और वे संतुष्ट होकर आशीर्वाद देते हैं। लेकिन शास्त्रों में यह भी कहा गया है कि इन दिनों कुछ ऐसे काम हैं जिन्हें भूलकर भी नहीं किए जा सकते।
अगर किसी व्यक्ति ने इन गलतियों को किया, तो माना जाता है कि पितृ नाराज़ हो सकते हैं और परिवार को कष्ट झेलना पड़ सकता है।
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पितृपक्ष में भूलकर भी न करें ये 10 काम
1. झूठ बोलना और विवाद करना
इस दौर में झगड़े-लड़ाई, गाली-गलौज और झूठ बोलना बहुत ही अशुभ माना गया है। घर में शांति और सकारात्मक माहौल बनाए रखना चाहिए।
2. मांसाहार और नशे से दूरी
पितृपक्ष में मांस, मछली, अंडा और शराब वगैरह जैसी चीज़ों का सेवन नहीं करना चाहिए। नशा करने से पितरों की आत्मा दुखी होती है।
3. दूसरों का अपमान न करें
खासतौर पर बुजुर्गों, गरीबों और ब्राह्मणों का अपमान करने से पितृ नाराज़ हो सकते हैं। सभी के साथ नम्रता से व्यवहार करना चाहिए।
4. जरूरतमंद को खाली हाथ न लौटाएँ
यदि कोई आपसे मदद या दान माँगे तो अपनी क्षमता अनुसार अवश्य दें। माना जाता है कि पितृपक्ष में किया गया दान सीधे पूर्वजों तक पहुँचता है।
5. पेड़-पौधों और पशु-पक्षियों को नुकसान न पहुँचाएँ
इस समय गाय, कुत्ते, कौवे और चींटियों को भोजन कराने की परंपरा है। जीवों को कष्ट देना बहुत बड़ा पाप माना गया है।
6. घर में अशुद्धि न रखें
पितृपक्ष के दौरान घर को साफ-सुथरा रखें। पूजा स्थल पर गंदगी या लापरवाही को पितरों का अपमान माना जाता है।
7. ब्राह्मणों और अतिथियों का अपमान न करें
श्राद्ध कर्म में ब्राह्मणों और अतिथियों को भोजन कराने की हabo परंपरा है। इनका अपमान करने से पितरों की कृपा नहीं मिलती।
8. आलस्य और टालमटोल न करें
श्राद्ध कर्म को निर्धारित समय और नियम से करना चाहिए। आलस्य करना और पूजा-पाठ में लापरवाही करना अशुभ माना जाता है।
9. बिना श्रद्धा के कर्म न करें
आप सिर्फ दिखावे के लिए श्राद्ध कर रहे हैं तो उसका कोई लाभ नहीं होगा। श्राद्ध हमेशा श्रद्धा और सच्चे मन से करना चाहिए।
10. कर्ज और वचन तोड़ना
पितृपक्ष में कर्ज़ चुकाना और वचन पालन करना पसंद किया जाता है। ये दिन समाज में किसी का विश्वास नहीं तोड़ना चाहिए। इससे बहुत नकारात्मक प्रभाव पड़ता है।
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पितृपक्ष में क्या होना चाहिए?
रोज अपने पितरों को जल अर्पित करें।
तर्पण और पिंडदान करें।
ब्राह्मणों और गरीबों को भोजन दें।
शांतिपूर्ण माहौल अपने घर में बनाए रखें।
पशु-पक्षियों और पेड़-पौधों की सेवा करें।
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???? निष्कर्ष:
पितृपक्ष कर्मकांड नहीं, परिवार के पूर्वजों को याद करने और उनके प्रति कृतज्ञता जताने का समय है। इस समयं किए गये छोटे-छोटे पुण्य कार्य के सुख-शांति और समृद्धि पूरे परिवार को प्राप्त होती है।
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